कुछ काले बादल देखे ,
देख कर हम सोच में बेठे,
कितना अँधेरा था छाया,
सोच सोच कर मनं घबराया,
बस कुछ ही पल के थे ये काले बादल,
बदलो ने लिया जो पानी का रूप,
और हो गया अँधेरा दूर,
फिर आये नीले बादल,
सुनहरे धुप के साथ,
खुले आसमान के साथ...
.jpg)
No comments:
Post a Comment