Tuesday, March 16, 2010

मेरा दोस्त


वो चाँद था मेरा दोस्त,चांदनी के साथ था,
दूर रहता था मुझसे मगर हर पल,उदास था,
लगता था उसको देख कर,
 शायद मिलना था उसको मुझसे,
मगर जाने कियो रहता था वो दूर सबसे अकेले,
कुछ तो मज़बूरी होगी उसकी भी,
 वरना दूर से यु न मिलता मुझसे,
आज भी वो मेरा दोस्त हे पर मुझसे दूर है...

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